नई दिल्ली: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2025 के ताजा आंकड़े देश की रोजगार स्थिति की कुछ महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं। सर्वे के अनुसार, देश में बेरोजगारी दर गिरकर 3.1% रह गई है, जबकि श्रम भागीदारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था फिलहाल संकट की स्थिति में नहीं है। इस दौरान कार्यरत श्रमशक्ति की संख्या 61.6 करोड़ हो गई है।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। सर्वे में यह देखा गया है कि पिछले एक वर्ष में महिलाओं के औसत दैनिक मजदूरी में 16 रुपये की वृद्धि हुई है, जो अब 315 रुपये प्रतिदिन है। जबकि इसी अवधि में पुरुषों की मजदूरी 1 रुपये घटकर 455 रुपये रह गई है। नियमित वेतनभोगी श्रमिकों में भी महिलाओं की औसत वेतन वृद्धि 7.16% रही, जो पुरुषों के 5.80% से कुछ अधिक है। यह संकेत है कि महिलाओं को वेतन वृद्धि के मामले में बेहतर मौका मिल रहा है।
फिर भी महिलाओं को कुल वेतन में पुरुषों से करीब 31% कम वेतन मिलता है, जो लगभग 5,900 रुपए की कमी के बराबर है। इसका अर्थ यह है कि समान काम के बावजूद वेतन असमानता बरकरार है। महिलाओं का अधिकतर हिस्सा कम वेतन वाले क्षेत्रों में काम कर रहा है या उनका भुगतान पुरुषों की तुलना में कम किया जा रहा है। स्वरोजगार क्षेत्र में भी पुरुषों की औसत मासिक कमाई 17,914 रुपए है, जबकि महिलाएं मात्र 6,374 रुपए महीना कमा रही हैं।
सर्वे के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि देश की श्रमशक्ति में 0.3% की मामूली वृद्धि हुई है, साथ ही शिक्षित वर्ग में बेरोजगारी दर 0.5% घटकर 6.5% रह गई है। विशेष रूप से युवा बेरोजगारी दर अब एकल अंकों में आ गई है, जो रोजगार के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि तकनीकी कौशल की कमी (स्किल गैप) चिंताजनक है। भारत की 67.8% आबादी कम से कम माध्यमिक शिक्षा प्राप्त है, लेकिन केवल 4.2% लोगों के पास औपचारिक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण का प्रमाण है। यह बड़े पैमाने पर स्किल डेफिसिट को दर्शाता है, जो भविष्य के रोजगार अवसरों पर असर डाल सकता है।
विशेष चिंता का विषय 15 से 29 वर्ष के युवाओं का एक बड़ा हिस्सा है, जिसमें 25% न तो रोजगार में हैं, न शिक्षा में, और न ही किसी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल हैं। यह दर्शाता है कि शिक्षा और रोजगार के बीच सामंजस्य स्थापित करना अभी भी बड़ी चुनौती है।
कुल मिलाकर पीएलएफएस 2025 के आंकड़े देश में रोजगार के क्षेत्र में मिली-जुली स्थिति को उजागर करते हैं, जहां रोजगार में वृद्धि के साथ-साथ वेतन असमानता और कौशल विकास की प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार और नीतिकारों के लिए यह आवश्यक है कि वे महिला रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करने पर ध्यान दें, ताकि एक समावेशी और मजबूत श्रम बाजार का निर्माण हो सके।
