लोकसभा में बुधवार को जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन बिल को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। वे जोर-जोर से “FCRA बिल वापस लो” के नारे लगाने लगे। इस विरोध प्रदर्शन के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने और नियम का पालन करने की अपील की, लेकिन विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध जताते रहे।
विपक्ष का कहना था कि संशोधन बिल में कई जरूरी सवालों का समाधान नहीं किया गया है और इसे बिना उचित चर्चा के पास नहीं किया जाना चाहिए। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया कि आज इस बिल पर लोकसभा में कोई बहस नहीं होगी। उन्होंने कहा कि बिल पर चर्चा के लिए उपयुक्त समय सुनिश्चित किया जाएगा लेकिन इस दिन बहस की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दरअसल, आज लोकसभा की कार्यसूची में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को बहस और पारित करने के लिए रखा गया था। यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और इसके तहत विदेशी अंशदान नियमों में सुधार करने का प्रयास किया गया है। संशोधन बिल में विदेशी अंशदान के नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने के प्रावधान हैं, ताकि देश में वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
साथ ही गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को कानूनी मान्यता देने वाला बिल लोकसभा में पेश किया है। यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो अमरावती आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश की राजधानी बन जाएगी। इस बिल को लेकर भी विपक्ष के कुछ सांसदों ने सवाल उठाए हैं और इसे लेकर चर्चा जारी है।
FCRA संशोधन बिल को लेकर विपक्षी नेताओं ने कहा कि इससे देश के गैर-सरकारी संगठनों की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है और विदेशी अंशदान की निगरानी के दायरे को अधिक व्यापक बनाने के कारण कई संगठन प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस बिल को वापस लेने और विस्तृत चर्चा करने की मांग की।
संसद की आगामी कार्यवाही और संबंधित बिलों से जुड़ी नवीनतम जानकारी के लिए देशभर के लोगों को संसद की वेबसाइट और विश्वसनीय न्यूज पोर्टल्स पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
इस प्रकार, लोकसभा में विदेशी अंशदान संशोधन बिल को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक दलों के बीच विपक्ष और सरकार के बीच विरोधाभास को स्पष्ट कर दिया है। जनता की नजरें अब इस पर होने वाली आगामी बहस और निर्णयों पर टिकी हुई हैं।
