पीएमके पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के संदर्भ में जातिगत जनगणना कराने की मांग की
तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के बीच, प्रमुख पार्टी पीएमके ने राज्य सरकार से जाति आधारित जनगणना कराने की सख्त अपील की है। पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
पीएमके ने आरोप लगाया है कि वर्तमान डीएमके सरकार ने बिना किसी पूंजीगत व्यय के भारी कर्ज जमा किया है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। इस आरोप के तहत पार्टी ने सरकार की वित्तीय नीतियों की आलोचना की।
जाति के आधार पर आर्थिक और सामाजिक नीतियां बनाने में सही आंकड़ों की भूमिका अहम होती है। पीएमके का मानना है कि जाति जनगणना से अलग-अलग समुदायों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, जिससे नीतिगत निर्णय अधिक प्रभावशाली और न्यायसंगत होंगे।
पार्टी ने आवेदन किया है कि पिछड़े वर्गों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए उचित अवसर सुनिश्चित करने हेतु सरकारी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं। जनगणना इस दिशा में पहला और आवश्यक कदम साबित हो सकता है।
राज्य में जातिगत जनगणना का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। पीएमके की मांग इसे नई राजनीतिक धाराओं में लाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों से पहले यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो गया है कि किस प्रकार की नीतियां लागू होंगी और कौन सी सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी। मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जाति जनगणना जैसे सवालों को किस रूप में प्राथमिकता मिलेगी।
