ली क्रोनिन की ‘द ममी’ समीक्षा: पुनरुद्धार या पुनरावृत्ति?
फिल्म निर्माता ली क्रोनिन की नई फ़िल्म ‘द ममी’ दर्शकों के सामने एक पुरानी फ्रैंचाइज़ी को फिर से जीवंत करने का प्रयास लेकर आई है, लेकिन यह प्रयास मुख्यतः नकल और उधार लिए गए विचारों में कहीं खो जाता दिखता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस पुनरुत्थान में कुछ भी नया या खोजपूर्ण नहीं है।
चित्रपट जगत में पुनरुद्धार का मतलब अक्सर पुरानी कहानियों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना होता है, लेकिन यह प्रयास कभी-कभी असफल भी हो सकता है, जैसा कि ‘द ममी’ के साथ हुआ है। कहानी की संरचना और पात्रों की प्रस्तुति में नवीनता का अभाव इस फिल्म की सबसे बड़ी कमी है।
फ्रैंचाइज़ी को नए सिरे से जीवंत करने के प्रश्न पर यह फिल्म दर्शाती है कि कभी-कभी बेहतर होगा कि पुरानी कथाएं यथावत छोड़ दी जाएं बजाय इसके कि उन्हें अधूरे या कमज़ोर तरीकों से पुनर्जीवित किया जाए। इस संदर्भ में, जहाँ तक पुनरुद्धार की बात है, ‘द ममी’ ने दर्शकों की उम्मीदें पूरी नहीं कीं।
फिल्म के प्रोडक्शन और दृश्य प्रभाव निश्चित तौर पर प्रभावशाली हैं, लेकिन कहानी की खत्म से लेकर किरदारों की गहराई तक, कुछ भी ऐसा नहीं है जो दर्शकों को स्थायी रूप से जोड़ सके। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि ‘द ममी’ फ्रैंचाइज़ी की दास्तान को आगे बढ़ाने के लिए एक कमजोर प्रयास है।
इस प्रकार, यदि पुनरुद्धार की तस्वीर यही है, तो संभवतः यह बेहतर होगा कि कब्र को कुछ समय और सुरक्षित封 किया जाए। आखिरकार, दुष्ट राक्षसों को भी बेहतर संरक्षक की आवश्यकता होती है।
